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डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£ दूर करने के लिठरोज 15 मिनट करें ये 5 योगासन
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ कà¥à¤¯à¤¾ है?
अवसाद या डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का संबंध मनोविजà¥à¤žà¤¾à¤¨ में मन की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ दà¥à¤–ों से होता है। इसे रोग या सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® माना जाता है। अधिकतर मामलों में सà¥à¤¥à¤¿â€‹à¤¤à¤¿ तब जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गंà¤à¥€à¤° समà¤à¥€ जाती है जब इसका संबंध किसी शखà¥à¤¸ के असफल पà¥à¤°à¥‡à¤® संबंधों से होता है।
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में किसी इंसान का लगाव उसके जीवन साथी के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है। उससे वियोग या बिछोह होने पर उपजने वाले डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ में मरीज खà¥à¤¦ को लाचार और निराश महसूस करता है।
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के शिकार इंसान के लिठसà¥à¤–, शांति, सफलता, खà¥à¤¶à¥€ यहां तक कि संबंध à¤à¥€ बेमानी होने लगते हैं। वह इंसान संबंधों में बेईमानी का उतà¥à¤¤à¤° अपने उगà¥à¤° सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ, गाली गलौज व अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• शंकालॠसà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ से देने की कोशिश करता है। डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के दौरान उसे सà¤à¥€ जगह निराशा, तनाव, अशांति और अरà¥à¤šà¤¿ की मौजूदगी समठआने लगती है।
हालांकि लोगों को डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का अनà¥à¤à¤µ कई अलग तरीकों से हो सकता है। ये आपके रोजमरà¥à¤°à¤¾ के कामों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। इसकी वजह से काम करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होने लगती है। ये आपके रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ और कà¥à¤› गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं पर à¤à¥€ असर डाल सकता है।
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के लिठयोग
योग करने के दौरान हमें कà¥à¤› आसन करने होते हैं और गहरी सांसें à¤à¥€ लेनी होती हैं। ये कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हमारे पैरासिमà¥à¤ªà¥ˆà¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• नरà¥à¤µà¥à¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® को सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ कर देते हैं। जिससे हमारा शरीर और मन रिलैकà¥à¤¸ होने लगता है। योग के दौरान शरीर से टेंशन दूर होने लगती है जबकि मांसपेशियां रिलैकà¥à¤¸ होने लगती हैं।
पैरासिमà¥à¤ªà¥ˆà¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• नरà¥à¤µà¥à¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® के सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ होने से à¤à¤‚डà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¿à¤‚स को रिलीज होने में मदद मिलती है, इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हैपà¥à¤ªà¥€ हारà¥à¤®à¥‹à¤‚स à¤à¥€ कहा जाता है। योगासन के अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ और पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® में सांस लेने और छोड़ने से सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸, à¤à¤‚गà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤Ÿà¥€ और​ डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ को दूर रखने में मदद मिलती है।
1. बालासन
बालासन, शरीर को उसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में ले जाता है, जिस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में माता के गरà¥à¤ में होता है। मां के गरà¥à¤ में रहकर बचà¥à¤šà¤¾ जिस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में 9 महीने तक जनà¥à¤® लेने का इंतजार करता है। बालासन करते हà¥à¤ योगी शरीर को उसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में ले जाता है।
इस आसन का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ पूरी तरह से गà¥à¤°à¥à¤¤à¥à¤µ बल के विपरीत शरीर से जोर लगाते हà¥à¤ किया जाठतो, कोई à¤à¥€ आसानी से मानसिक, शारीरिक और à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• राहत पा सकता है।
बालासन, साधारण कठिनाई या बेसिक लेवल का आसन है। इसे विनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ योग की शैली का आसन माना जाता है। बालासन का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ 1 से 3 मिनट तक किया जाना चाहिà¤à¥¤ इसे करने में किसी किसà¥à¤® के दोहराव की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती है।
बालासन करने की विधि :
योग मैट पर घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के बल बैठजाà¤à¤‚।
दोनों टखनों और à¤à¤¡à¤¼à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को आपस में छà¥à¤†à¤à¤‚।
धीरे-धीरे अपने घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ को बाहर की तरफ जितना हो सके फैलाà¤à¤‚।
गहरी सांस खींचकर आगे की तरफ à¤à¥à¤•ें।
पेट को दोनों जांघों के बीच ले जाà¤à¤‚ और सांस छोड़ दें।
कमर के पीछे के हिसà¥à¤¸à¥‡ में तà¥à¤°à¤¿à¤•ासà¥à¤¥à¤¿/सैकà¥à¤°à¤® (sacrum) को चौड़ा करें।
अब कूलà¥à¤¹à¥‡ को सिकोड़ते हà¥à¤ नाà¤à¤¿ की तरफ खींचने की कोशिश करें।
इनर थाइज या à¤à¥€à¤¤à¤° जांघों पर सà¥à¤¥à¤¿à¤° हो जाà¤à¤‚।
सिर को गरà¥à¤¦à¤¨ के थोड़ा पीछे से उठाने की कोशिश करें।
टेलबोन को पेलà¥à¤µà¤¿à¤¸ की तरफ खींचने की कोशिश करें।
हाथों को सामने की तरफ लाà¤à¤‚ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने सामने रख लें।
दोनों हाथ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ की सीध में ही रहेंगे।
दोनों कंधों को फरà¥à¤¶ से छà¥à¤†à¤¨à¥‡ की कोशिश करें।
आपके कंधों का खिंचाव शोलà¥à¤¡à¤° बà¥à¤²à¥‡à¤¡ से पूरी पीठमें महसूस होना चाहिà¤à¥¤
इसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में 30 सेकेंड से लेकर कà¥à¤› मिनट तक बने रहें।
धीरे-धीरे फà¥à¤°à¤‚ट टोरसो को खींचते हà¥à¤ सांस लें।
पेलà¥à¤µà¤¿à¤¸ को नीचे à¤à¥à¤•ाते हà¥à¤ टेल बोन को उठाà¤à¤‚ और सामानà¥à¤¯ हो जाà¤à¤‚।
2. à¤à¥à¤œà¤‚गासन
à¤à¥à¤œà¤‚गासन, विनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ और अषà¥à¤Ÿà¤¾à¤‚ग शैली का योगासन है। ये आसन रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ में खिंचाव लाता है और पूरी बॉडी का पोशà¥à¤šà¤° सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¤à¤¾ है। सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨ में आने वाला ये खिंचाव शरीर और मन में गहरी संतà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ का विकास करता है।
à¤à¥à¤œà¤‚गासन के फायदे अनेक हैं। इसके नियमित अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ से​ डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ को दूर करने में मदद मिल सकती है। à¤à¥à¤œà¤‚गासन के अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ से पूरे शरीर को खोलने और तनाव को कम करने में मदद मिलती है। आखिर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ शरीर में ही तो सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ मन रहता है।
à¤à¥à¤œà¤‚गासन करने की विधि :
पेट के बल जमीन पर लेट जाà¤à¤‚।
दोनों हथेलियों को जांघों के पास जमीन की तरफ करके रखें।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि टखने à¤à¤•-दूसरे को छूते रहें।
हाथों को कंधे के बराबर लेकर आà¤à¤‚ और हथेलियों को फरà¥à¤¶ की तरफ करें।
शरीर का वजन अपनी हथेलियों पर डालें, सांस à¤à¥€à¤¤à¤° खींचें।
सिर को उठाकर पीठकी तरफ खींचें।
इस वकà¥à¤¤ तक आपकी कà¥à¤¹à¤¨à¥€ मà¥à¤¡à¤¼à¥€ हà¥à¤ˆ रहेगी।
सिर को पीछे खींचते हà¥à¤ छाती को à¤à¥€ आगे की तरफ निकालें।
सिर को सांप के फन की तरह खींचकर रखें।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें कि, कंधे कान से दूर रहें और कंधे मजबूत बने रहें।
हिपà¥à¤¸, जांघों और पैरों से फरà¥à¤¶ की तरफ दबाव बढ़ाà¤à¤‚।
शरीर को इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में करीब 15 से 30 सेकेंड तक रखें।
इस दौरान, सांस की गति सामानà¥à¤¯ बनाठरखें।
à¤à¤¸à¤¾ महसूस करें कि आपका पेट फरà¥à¤¶ की तरफ दब रहा है।
अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ के बाद इस आसन को 2 मिनट तक à¤à¥€ कर सकते हैं।
मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ को छोड़ने के लिà¤, धीरे-धीरे अपने हाथों को वापस साइड पर लेकर आà¤à¤‚।
सिर को फरà¥à¤¶ पर विशà¥à¤°à¤¾à¤® दें। अपने हाथों को सिर के नीचे रखें।
धीरे से सिर को à¤à¤• तरफ मोड़ लें और धीमी गति से दो मिनट तक सांस लें।
3. सà¥à¤–ासन
सà¥à¤–ासन को किसी à¤à¥€ उमà¥à¤° और लेवल के योगी कर सकते हैं। बैठकर किया जाने वाला सà¥à¤–ासन सरल होने के साथ ही उपयोगी à¤à¥€ है। इस आसन के अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ से घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ और टखने में खिंचाव आता है। इसके अलावा ये पीठको à¤à¥€ मजबूत करने में मदद करता है।
सà¥à¤–ासन कई रोगों को दूर करने में à¤à¥€ मदद करता है। कई मानसिक और शारीरिक बीमारियां à¤à¥€ इसके नियमित अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ से ठीक होती देखी गईं हैं। इसके नियमित अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ से चकà¥à¤° और कà¥à¤‚डलिनी जागरण में à¤à¥€ मदद मिलती है।
सà¥à¤–ासन करने की विधि :
योग मैट पर पीठको सीधे रखते हà¥à¤ और पैरों को फैलाकर बैठजाà¤à¤‚।
दोनों पैरों को बारी-बारी से कà¥à¤°à¥‰à¤¸ करते हà¥à¤ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ से à¤à¥€à¤¤à¤° की तरफ मोड़ें।
घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ बाहर की तरफ रहें।
पालथी सी मारकर बैठजाà¤à¤‚।
पैर आराम से रहेंगे। और कोशिश करें कि घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ जमीन को छूते रहें।
अब पिंडलियों से à¤à¤• तà¥à¤°à¤¿à¤à¥à¤œ जैसा बन गया है।
पिंडलियां कà¥à¤°à¥‰à¤¸ होकर जांघों के नीचे हैं।
आपके पैरों और पेलà¥à¤µà¤¿à¤¸ के बीच में सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ जगह होनी चाहिà¤à¥¤
पेलà¥à¤µà¤¿à¤¸ का à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अपनी पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में रहना चाहिà¤à¥¤
रीढ़ की निचली हडà¥à¤¡à¥€ और पà¥à¤¯à¥‚बिक बोन फरà¥à¤¶ से à¤à¤• समान दूरी पर रहे।
हथेलियों को या तो अपनी गोद में रख लें। या फिर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ पर रख सकते हैं।
हथेलियां ऊपर की तरफ रहें या फिर नीचे की तरफ रहें।
रीढ़ की निचली हडà¥à¤¡à¥€ को सीधा करें और कंधों को तानकर रखें।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि कमर का निचला हिसà¥à¤¸à¤¾ मà¥à¤¡à¤¼à¥‡ नहीं।
निचली पसलियां आगे की तरफ मà¥à¤¡à¤¼ जाà¤à¤‚गी।
इस आसन में जब तक आराम से बैठे रहना चाहें, बैठे रह सकते हैं।
सà¥à¤–ासन करते समय रोज अपने पैरों की​ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को बदलते रहें।
4. सेतॠबंधासन
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ योगियों ने किसी नदी या दà¥à¤°à¥à¤—म सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ को पार करने के लिठबनाठजाने वाले पà¥à¤² से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ लेकर सेतॠबंधासन (Setu Bandhasana) या सेतॠबंध सरà¥à¤µà¤¾à¤‚गासन की रचना की है। सेतॠबंधासन शरीर को मजबूती और खिंचाव देने के लिठबेहतरीन आसनों में से à¤à¤• है। इसे अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ में बà¥à¤°à¤¿à¤œ पोज (Bridge Pose) à¤à¥€ कहा जाता है।
सेतॠया पà¥à¤² किसी दà¥à¤°à¥à¤—म सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ या नदी के किनारों को आपस में जोड़ता है। ये आसन à¤à¥€ हमारे मन और शरीर के बीच तालमेल बैठाने में मदद करता है। जैसे पà¥à¤² का काम टà¥à¤°à¥ˆà¤«à¤¿à¤• और दबाव को सहन करना है, ये आसन à¤à¥€ हमारे शरीर से टेंशन को निकालता और कम करने में मदद करता है।
सेतॠबंधासन करने की विधि :
योग मैट पर पीठके बल लेट जाà¤à¤‚। सांसो की गति सामानà¥à¤¯ रखें।
इसके बाद हाथों को बगल में रख लें।
अब धीरे-धीरे अपने पैरों को घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ से मोड़कर हिपà¥à¤¸ के पास ले आà¤à¤‚।
हिपà¥à¤¸ को जितना हो सके फरà¥à¤¶ से ऊपर की तरफ उठाà¤à¤‚। हाथ जमीन पर ही रहेंगे।
कà¥à¤› देर के लिठसांस को रोककर रखें।
इसके बाद सांस छोड़ते हà¥à¤ वापस जमीन पर आà¤à¤‚।
पैरों को सीधा करें और विशà¥à¤°à¤¾à¤® करें।
10-15 सेकेंड तक ​आराम करने के बाद फिर से शà¥à¤°à¥‚ करें।
5. शवासन
आम धारणा है कि शवासन बेहद सरल आसन है। जबकि हकीकत ये है कि शवासन योग विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ के सबसे कठिन आसनों में से à¤à¤• है। ये आसन देखने में बेहद सरल लगता है लेकिन इसमें सिरà¥à¤« लेटना ही नहीं होता है बलà¥à¤•ि अपने मन की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं और शरीर की थकान दोनों पर à¤à¤• साथ नियंतà¥à¤°à¤£ पाना होता है।
शवासन को योगा सेशन के बाद किया जाता है। इसे करने से डीप हीलिंग के साथ ही शरीर को गहरे तक आराम à¤à¥€ मिलता है। इस आसन को तब à¤à¥€ किया जा सकता है जब आप बà¥à¤°à¥€ तरह से थके हों और आपको थोड़ी ही देर में वापस काम पर लौटना हो। शवासन का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ न सिरà¥à¤« आपको ताजगी ​बलà¥à¤•ि ऊरà¥à¤œà¤¾ à¤à¥€ देगा।
शवासन करने की विधि :
योग मैट पर पीठके बल लेट जाà¤à¤‚।
किसी तकिया या कà¥à¤¶à¤¨ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न करें।
अपनी आंखें बंद कर लें।
दोनों टांगों को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से अलग-अलग कर लें।
शरीर पूरी तरह से रिलैकà¥à¤¸ हो।
पैरों के दोनों अंगूठे साइड की तरफ à¤à¥à¤•े हà¥à¤ हों।
हाथ शरीर से थोड़ी दूर हों।
हथेलियों को खà¥à¤²à¤¾ लेकिन ऊपर की तरफ रखें।
धीरे-धीरे शरीर के हर हिसà¥à¤¸à¥‡ की तरफ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना शà¥à¤°à¥‚ करें।
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ पैरों के अंगूठे से करें।
à¤à¤¸à¤¾ करते हà¥à¤ सांस लेने की गति à¤à¤•दम धीमी कर दें।
धीरे-धीरे आप गहरे मेडिटेशन में जाने लगेंगे।
आलस या उबासी आने पर सांस लेने की गति तेज कर दें।
शवासन करते हà¥à¤ कà¤à¥€ à¤à¥€ सोना नहीं चाहिà¤à¥¤
सांस लेने की गति धीमी​ लेकिन गहरी रखें।
आपका फोकस सिरà¥à¤« खà¥à¤¦ और अपने शरीर पर ही रहेगा।
10-12 मिनट के बाद, आपका शरीर पूरी तरह से रिलैकà¥à¤¸ हो जाà¤à¤—ा।
अब à¤à¤• तरफ को करवट ले लें। दोनों आंखों को बंद रखें।
à¤à¤• मिनट तक इसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बैठे रहें।
इसके बाद धीरे-धीरे उठें और फिर सà¥à¤–ासन में बैठजाà¤à¤‚।
गहरी सांसें लें और आंखें खोलने से पहले आसपास के माहौल का जायजा लें।
इसके बाद धीरे-धीरे आंखें खोल दें।
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