डिप्रेशन से बचने के लिए कौन सा योग करें?HealthPlanet

Posted on Sat 3rd Dec 2022 : 17:16

डिप्रेशन के लक्षण दूर करने के लिए रोज 15 मिनट करें ये 5 योगासन
डिप्रेशन क्या है?

अवसाद या डिप्रेशन का संबंध मनोविज्ञान में मन की भावनाओं से जुड़े दुखों से होता है। इसे रोग या सिंड्रोम माना जाता है। अधिकतर मामलों में स्थि​ति तब ज्यादा गंभीर समझी जाती है जब इसका संबंध किसी शख्स के असफल प्रेम संबंधों से होता है।

डिप्रेशन के ज्यादातर मामलों में किसी इंसान का लगाव उसके जीवन साथी के प्रति बहुत ज्यादा होता है। उससे वियोग या बिछोह होने पर उपजने वाले डिप्रेशन में मरीज खुद को लाचार और निराश महसूस करता है।

डिप्रेशन के शिकार इंसान के लिए सुख, शांति, सफलता, खुशी यहां तक कि संबंध भी बेमानी होने लगते हैं। वह इंसान संबंधों में बेईमानी का उत्तर अपने उग्र स्वभाव, गाली गलौज व अत्यधिक शंकालु स्वभाव से देने की कोशिश करता है। डिप्रेशन के दौरान उसे सभी जगह निराशा, तनाव, अशांति और अरुचि की मौजूदगी समझ आने लगती है।

हालांकि लोगों को डिप्रेशन का अनुभव कई अलग तरीकों से हो सकता है। ये आपके रोजमर्रा के कामों को प्रभावित कर सकता है। इसकी वजह से काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। ये आपके रिश्तों और कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं पर भी असर डाल सकता है।
डिप्रेशन के लिए योग

योग करने के दौरान हमें कुछ आसन करने होते हैं और गहरी सांसें भी लेनी होती हैं। ये क्रियाएं हमारे पैरासिम्पैथेटिक नर्व्स सिस्टम को सक्रिय कर देते हैं। जिससे हमारा शरीर और मन रिलैक्स होने लगता है। योग के दौरान शरीर से टेंशन दूर होने लगती है जबकि मांसपेशियां रिलैक्स होने लगती हैं।

पैरासिम्पैथेटिक नर्व्स सिस्टम के सक्रिय होने से एंड्रोफिंस को रिलीज होने में मदद मिलती है, इन्हें हैप्पी हार्मोंस भी कहा जाता है। योगासन के अभ्यास और प्राणायाम में सांस लेने और छोड़ने से स्ट्रेस, एंग्जाइटी और​ डिप्रेशन को दूर रखने में मदद मिलती है।
1. बालासन

बालासन, शरीर को उसी स्थिति में ले जाता है, जिस स्थिति में माता के गर्भ में होता है। मां के गर्भ में रहकर बच्चा जिस स्थिति में 9 महीने तक जन्म लेने का इंतजार करता है। बालासन करते हुए योगी शरीर को उसी स्थिति में ले जाता है।

इस आसन का अभ्यास पूरी तरह से गुरुत्व बल के विपरीत शरीर से जोर लगाते हुए किया जाए तो, कोई भी आसानी से मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक राहत पा सकता है।

बालासन, साधारण कठिनाई या बेसिक लेवल का आसन है। इसे विन्यास योग की शैली का आसन माना जाता है। बालासन का अभ्यास 1 से 3 मिनट तक किया जाना चाहिए। इसे करने में किसी किस्म के दोहराव की आवश्यकता नहीं होती है।
बालासन करने की विधि :

योग मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं।
दोनों टखनों और एड़ियों को आपस में छुआएं।
धीरे-धीरे अपने घुटनों को बाहर की तरफ जितना हो सके फैलाएं।
गहरी सांस खींचकर आगे की तरफ झुकें।
पेट को दोनों जांघों के बीच ले जाएं और सांस छोड़ दें।
कमर के पीछे के हिस्से में त्रिकास्थि/सैक्रम (sacrum) को चौड़ा करें।
अब कूल्हे को सिकोड़ते हुए नाभि की तरफ खींचने की कोशिश करें।
इनर थाइज या भीतर जांघों पर स्थिर हो जाएं।
सिर को गर्दन के थोड़ा पीछे से उठाने की कोशिश करें।
टेलबोन को पेल्विस की तरफ खींचने की कोशिश करें।
हाथों को सामने की तरफ लाएं और उन्हें अपने सामने रख लें।
दोनों हाथ घुटनों की सीध में ही रहेंगे।
दोनों कंधों को फर्श से छुआने की कोशिश करें।
आपके कंधों का खिंचाव शोल्डर ब्लेड से पूरी पीठ में महसूस होना चाहिए।
इसी स्थिति में 30 सेकेंड से लेकर कुछ मिनट तक बने रहें।
धीरे-धीरे फ्रंट टोरसो को खींचते हुए सांस लें।
पेल्विस को नीचे झुकाते हुए टेल बोन को उठाएं और सामान्य हो जाएं।

2. भुजंगासन

भुजंगासन, विन्यास और अष्टांग शैली का योगासन है। ये आसन रीढ़ की हड्डी में खिंचाव लाता है और पूरी बॉडी का पोश्चर सुधारता है। स्पाइन में आने वाला ये खिंचाव शरीर और मन में गहरी संतुष्टि की भावना का विकास करता है।

भुजंगासन के फायदे अनेक हैं। इसके नियमित अभ्यास से​ डिप्रेशन की समस्या को दूर करने में मदद मिल सकती है। भुजंगासन के अभ्यास से पूरे शरीर को खोलने और तनाव को कम करने में मदद मिलती है। आखिर स्वस्थ शरीर में ही तो स्वस्थ मन रहता है।
भुजंगासन करने की विधि :

पेट के बल जमीन पर लेट जाएं।
दोनों हथेलियों को जांघों के पास जमीन की तरफ करके रखें।
ध्यान रखें कि टखने एक-दूसरे को छूते रहें।
हाथों को कंधे के बराबर लेकर आएं और हथेलियों को फर्श की तरफ करें।
शरीर का वजन अपनी हथेलियों पर डालें, सांस भीतर खींचें।
सिर को उठाकर पीठ की तरफ खींचें।
इस वक्त तक आपकी कुहनी मुड़ी हुई रहेगी।
सिर को पीछे खींचते हुए छाती को भी आगे की तरफ निकालें।
सिर को सांप के फन की तरह खींचकर रखें।
ध्यान दें कि, कंधे कान से दूर रहें और कंधे मजबूत बने रहें।
हिप्स, जांघों और पैरों से फर्श की तरफ दबाव बढ़ाएं।
शरीर को इस स्थिति में करीब 15 से 30 सेकेंड तक रखें।
इस दौरान, सांस की गति सामान्य बनाए रखें।
ऐसा महसूस करें कि आपका पेट फर्श की तरफ दब रहा है।
अभ्यास के बाद इस आसन को 2 मिनट तक भी कर सकते हैं।
मुद्रा को छोड़ने के लिए, धीरे-धीरे अपने हाथों को वापस साइड पर लेकर आएं।
सिर को फर्श पर विश्राम दें। अपने हाथों को सिर के नीचे रखें।
धीरे से सिर को एक तरफ मोड़ लें और धीमी गति से दो मिनट तक सांस लें।

3. सुखासन

सुखासन को किसी भी उम्र और लेवल के योगी कर सकते हैं। बैठकर किया जाने वाला सुखासन सरल होने के साथ ही उपयोगी भी है। इस आसन के अभ्यास से घुटनों और टखने में खिंचाव आता है। इसके अलावा ये पीठ को भी मजबूत करने में मदद करता है।

सुखासन कई रोगों को दूर करने में भी मदद करता है। कई मानसिक और शारीरिक बीमारियां भी इसके नियमित अभ्यास से ठीक होती देखी गईं हैं। इसके नियमित अभ्यास से चक्र और कुंडलिनी जागरण में भी मदद मिलती है।
सुखासन करने की विधि :

योग मैट पर पीठ को सीधे रखते हुए और पैरों को फैलाकर बैठ जाएं।
दोनों पैरों को बारी-बारी से क्रॉस करते हुए घुटनों से भीतर की तरफ मोड़ें।
घुटने बाहर की तरफ रहें।
पालथी सी मारकर बैठ जाएं।
पैर आराम से रहेंगे। और कोशिश करें कि घुटने जमीन को छूते रहें।
अब पिंडलियों से एक त्रिभुज जैसा बन गया है।
पिंडलियां क्रॉस होकर जांघों के नीचे हैं।
आपके पैरों और पेल्विस के बीच में सुरक्षित जगह होनी चाहिए।
पेल्विस का एरिया अपनी प्राकृतिक स्थिति में रहना चाहिए।
रीढ़ की निचली हड्डी और प्यूबिक बोन फर्श से एक समान दूरी पर रहे।
हथेलियों को या तो अपनी गोद में रख लें। या फिर उन्हें घुटनों पर रख सकते हैं।
हथेलियां ऊपर की तरफ रहें या फिर नीचे की तरफ रहें।
रीढ़ की निचली हड्डी को सीधा करें और कंधों को तानकर रखें।
ध्यान रखें कि कमर का निचला हिस्सा मुड़े नहीं।
निचली पसलियां आगे की तरफ मुड़ जाएंगी।
इस आसन में जब तक आराम से बैठे रहना चाहें, बैठे रह सकते हैं।
सुखासन करते समय रोज अपने पैरों की​ स्थिति को बदलते रहें।

4. सेतु बंधासन

भारतीय योगियों ने किसी नदी या दुर्गम स्थान को पार करने के लिए बनाए जाने वाले पुल से प्रेरणा लेकर सेतु बंधासन (Setu Bandhasana) या सेतु बंध सर्वांगासन की रचना की है। सेतु बंधासन शरीर को मजबूती और खिंचाव देने के लिए बेहतरीन आसनों में से एक है। इसे अंग्रेजी में ब्रिज पोज (Bridge Pose) भी कहा जाता है।

सेतु या पुल किसी दुर्गम स्थान या नदी के किनारों को आपस में जोड़ता है। ये आसन भी हमारे मन और शरीर के बीच तालमेल बैठाने में मदद करता है। जैसे पुल का काम ट्रैफिक और दबाव को सहन करना है, ये आसन भी हमारे शरीर से टेंशन को निकालता और कम करने में मदद करता है।
सेतु बंधासन करने की विधि :

योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। सांसो की गति सामान्य रखें।
इसके बाद हाथों को बगल में रख लें।
अब धीरे-धीरे अपने पैरों को घुटनों से मोड़कर हिप्स के पास ले आएं।
हिप्स को जितना हो सके फर्श से ऊपर की तरफ उठाएं। हाथ जमीन पर ही रहेंगे।
कुछ देर के लिए सांस को रोककर रखें।
इसके बाद सांस छोड़ते हुए वापस जमीन पर आएं।
पैरों को सीधा करें और विश्राम करें।
10-15 सेकेंड तक ​आराम करने के बाद फिर से शुरू करें।

5. शवासन

आम धारणा है कि शवासन बेहद सरल आसन है। जबकि हकीकत ये है कि शवासन योग विज्ञान के सबसे कठिन आसनों में से एक है। ये आसन देखने में बेहद सरल लगता है लेकिन इसमें सिर्फ लेटना ही नहीं होता है बल्कि अपने मन की भावनाओं और शरीर की थकान दोनों पर एक साथ नियंत्रण पाना होता है।

शवासन को योगा सेशन के बाद किया जाता है। इसे करने से डीप हीलिंग के साथ ही शरीर को गहरे तक आराम भी मिलता है। इस आसन को तब भी किया जा सकता है जब आप बुरी तरह से थके हों और आपको थोड़ी ही देर में वापस काम पर लौटना हो। शवासन का अभ्यास न सिर्फ आपको ताजगी ​बल्कि ऊर्जा भी देगा।
शवासन करने की विधि :

योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
किसी तकिया या कुशन का इस्तेमाल न करें।
अपनी आंखें बंद कर लें।
दोनों टांगों को ध्यान से अलग-अलग कर लें।
शरीर पूरी तरह से रिलैक्स हो।
पैरों के दोनों अंगूठे साइड की तरफ झुके हुए हों।
हाथ शरीर से थोड़ी दूर हों।
हथेलियों को खुला लेकिन ऊपर की तरफ रखें।
धीरे-धीरे शरीर के हर हिस्से की तरफ ध्यान देना शुरू करें।
शुरुआत पैरों के अंगूठे से करें।
ऐसा करते हुए सांस लेने की गति एकदम धीमी कर दें।
धीरे-धीरे आप गहरे मेडिटेशन में जाने लगेंगे।
आलस या उबासी आने पर सांस लेने की गति तेज कर दें।
शवासन करते हुए कभी भी सोना नहीं चाहिए।
सांस लेने की गति धीमी​ लेकिन गहरी रखें।
आपका फोकस सिर्फ खुद और अपने शरीर पर ही रहेगा।
10-12 मिनट के बाद, आपका शरीर पूरी तरह से रिलैक्स हो जाएगा।
अब एक तरफ को करवट ले लें। दोनों आंखों को बंद रखें।
एक मिनट तक इसी स्थिति में बैठे रहें।
इसके बाद धीरे-धीरे उठें और फिर सुखासन में बैठ जाएं।
गहरी सांसें लें और आंखें खोलने से पहले आसपास के माहौल का जायजा लें।
इसके बाद धीरे-धीरे आंखें खोल दें।

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